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कोरोना महामारी के 100 दिन: पटना में संक्रमण का दर अन्य शहर से कम, रिकवरी सबसे ज्यादा

पटना में सोमवार को कोरोना संक्रमण का सौवां दिन होगा। इन 100 दिनों में देश के किसी भी मेट्रोपॉलिटन और समान जनसंख्या वाले शहरों इंदौर और अहमदाबाद की तुलना में पटना में संक्रमण दर काफी कम है। यही नहीं यहां एक्टिव केस और मौत की तुलना करें तो यह अन्य शहरों की तुलना में न के बराबर यानी काफी कम है। यहां जो मौतें हुई हैं उनमें से दो ही पूरी तरह कोरोना से मरे। बाकी चार अन्य कैंसर, किडनी, ब्रेन ट्यूमर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे।

दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, इंदौर आदि शहरों में कोरोना संक्रमण की शुरुआत मार्च के पहले सप्ताह से ही हो चुकी थी। हालांकि तबतक उन शहरों में भी इक्के-दुक्के मरीज ही  पाए जा रहे थे। 22 मार्च को लॉकडाउन तक इनमें से मुंबई छोड़ सभी शहरों में संक्रमितों की संख्या 100 से कम थी। 22 को ही पटना में पहला कोरोना संक्रमित मिला था। तब से आज तक यानी 100 दिनों में इन शहरों में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा पटना की तुलना में कई गुना ज्यादा बढ़ा। पटना में जहां यह आंकड़ा 570 तक पहुंचा, वहीं दिल्ली में  80 हजार 188, मुंबई में 73 हजार 447, चेन्नई में 22 हजार 993, कोलकाता में 2684, अहमदाबाद में 13 हजार 968 और मध्यप्रदेश के इंदौर में 3722 लोग संक्रमित हुए।

वहीं पटना में कोरोना से अबतक सिर्फ छह लोगों की मौत हुई है। इनमें से चार कैंसर, किडनी, ब्रेन ट्यूमर अथवा अस्थमा जैसी किसी ना किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, जबकि दिल्ली में अबतक 2588 लोग कोरोना के शिकार हो चुके हैं। वहीं मुंबई में 1577, कोलकाता में 52, अहमदाबाद में 994 , चेन्नई में 197 और इंदौर में 153  लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं रिकवरी रेट की बात करें तो दिल्ली में 49,301, मुंबई में 46 हजार 313 लोग कोरोना पर विजय पा चुके हैं। यह लगभग 50 से 55 प्रतिशत तक है। वहीं, पटना में एक सप्ताह पहले रिकवरी रेट 78 प्रतिशत तक पहुंच गया था। यहां एक्टिव केस की संख्या भी बहुत कम हो गई थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह में प्रवासी मजदूरों से संक्रमण दर में बढ़ोत्तरी होने से रिकवरी रेट प्रभावित हुआ। फिर भी यह दिल्ली, मुंबई के मुकाबले बेहतर स्थति में है। यहां अब एक्टिव केस 252 हैं। रिकवरी रेट यहां भी लगभग 62 प्रतिशत है।

 

अब तक पांच लोग गए वेंटिलेटर पर, दो की हुई मौत
राज्यभर में कोरोना के पांच गंभीर मरीज ही वेंटेलेटर पर गए थे। उनमें से दो की मौत हुई। पटना के अबतक एक ही मरीज को वेंटिलेटर पर ले जाने की जरूरत हुई। वह स्वस्थ हो गया।

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